अज्ञात बांझपन क्या है? जानिए इसके कारण, जांच व IVF इलाज

Unexplained infertility treatment consultation at Jijivisha IVF Hospital Rewari with Dr Anshu Yadav

वो सवाल जो हर दूसरा दंपति पूछता है – “मैडम, रिपोर्ट तो सब ठीक है, फिर भी खुशखबरी क्यों नहीं मिल रही?”

ये सवाल जिजीविषा अस्पताल एवं प्रजनन केंद्र, रेवाड़ी में लगभग हर हफ्ते सुनने को मिलता है। पति-पत्नी दोनों की जांच सामान्य, मासिक धर्म समय पर, पुरुष की जांच भी ठीक, गर्भाशय की नलियां भी खुली – फिर भी महीने दर महीने निराशा हाथ लगती है। इसी स्थिति को डॉक्टर अज्ञात बांझपन या unexplained infertility कहते हैं।

ये कोई दुर्लभ समस्या नहीं है। संतान ना होने की समस्या से जूझ रहे हर तीन में से लगभग एक दंपति को यही जांच परिणाम मिलता है। रेवाड़ी, नारनौल, भिवाड़ी, धारूहेड़ा, बावल, कोसली और महेंद्रगढ़ जैसे इलाकों में तो ये समस्या और भी बड़ी चिंता बन जाती है – क्योंकि परिवार और समाज का दबाव पहले से ही बहुत ज़्यादा होता है और “सब कुछ सामान्य है” सुनकर लोग और उलझन में पड़ जाते हैं।

नीचे सात बिंदुओं में पूरी बात सरल भाषा में समझाई गई है।

अज्ञात बांझपन का असली मतलब क्या है

चिकित्सा भाषा में, किसी दंपति को अज्ञात बांझपन तभी कहा जाता है जब:

  • दंपति बारह महीने तक बिना किसी रोक-टोक के नियमित रूप से संबंध बना चुका हो (अगर महिला की उम्र पैंतीस वर्ष से ऊपर है, तो ये समय छह महीने ही माना जाता है)
  • महिला में अंडोत्सर्ग सामान्य रूप से हो रहा है
  • महिला की गर्भाशय की दोनों नलियां खुली हैं
  • पुरुष की वीर्य जांच रिपोर्ट तय मानकों के अनुसार सामान्य है
  • दोनों की शारीरिक जांच और पुरानी चिकित्सा जानकारी में कोई गड़बड़ी नहीं मिलती

इतना सब सामान्य होने के बावजूद गर्भधारण नहीं होता – इसी को डॉक्टर “अज्ञात कारण वाला बांझपन” कहते हैं।

एक बात साफ-साफ समझना ज़रूरी है – “अज्ञात” का मतलब “कोई कारण नहीं है” बिल्कुल नहीं होता। असली मतलब यह है कि हमारी सामान्य जांचें उस कारण को पकड़ नहीं पा रही हैं। अंडे की गुणवत्ता में हल्की कमी, शुक्राणु का अंडे तक पहुंचकर उसे ठीक से मिला ना पाना या गर्भाशय की भीतरी परत का भ्रूण को ठीक से ना अपनाना – ये सब बातें साधारण रक्त जांच या अल्ट्रासाउंड में सामने नहीं आतीं।

कौन-कौन सी जांचों के बाद ये निष्कर्ष दिया जाता है

जब भी कोई दंपति एक साल से ज़्यादा कोशिश के बाद भी संतान ना होने पर हमारे पास आता है, तो ये जांचें की जाती हैं:

  1. दोनों पति-पत्नी की पूरी चिकित्सा जानकारी और शारीरिक जांच
  2. त्रि-आयामी अल्ट्रासाउंड जांच – गर्भाशय और अंडाशय की बनावट देखने के लिए
  3. गर्भाशय की भीतरी जांच – गर्भाशय के अंदर की स्थिति समझने के लिए
  4. वीर्य जांच – शुक्राणु की संख्या, गति और बनावट जांचने के लिए
  5. हार्मोन जांच – अंडोत्सर्ग की पुष्टि करने के लिए
  6. अंडाशय भंडार जांच – अंडों की संख्या और गुणवत्ता जानने के लिए

अगर ये सभी जांचें सामान्य आती हैं, तभी अज्ञात बांझपन का निष्कर्ष दिया जाता है। एक ज़रूरी बात – पेट के अंदर की बड़ी दूरबीन जांच (लैप्रोस्कोपी) हर किसी के लिए ज़रूरी नहीं होती, जब तक गर्भाशय से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी के लक्षण ना दिखें।

डॉ. अंशु यादव हमेशा यही सलाह देती हैं – “हर मरीज़ को सीधे सबसे महंगे इलाज की ज़रूरत नहीं होती, पहले सही कारण ढूंढना ज़्यादा ज़रूरी है।”

क्या टेस्ट ट्यूब बेबी अज्ञात बांझपन का समाधान है? 

हां – और शोध के अनुसार ये अब तक का सबसे भरोसेमंद इलाज है।

एक बड़े शोध में अज्ञात बांझपन वाले दंपतियों को दो समूहों में बांटा गया – एक समूह को तीन बार गर्भाशय में शुक्राणु प्रवेश की प्रक्रिया दी गई, दूसरे समूह को एक बार टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया दी गई। नतीजा – पहले तरीके में सफलता की दर पच्चीस प्रतिशत रही, जबकि दूसरे तरीके में इकत्तीस प्रतिशत रही। उम्र बढ़ने के साथ ये फासला और भी बढ़ता जाता है।

टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया इतनी असरदार क्यों है? क्योंकि ये उस छिपे हुए कारण को ढूंढने में समय नहीं गंवाती, बल्कि सीधे समाधान पर काम करती है। चाहे कारण अंडे की हल्की कमज़ोरी हो या शुक्राणु-अंडा मिलन में कोई बारीक अड़चन – इस प्रक्रिया में अंडे और शुक्राणु को प्रयोगशाला के नियंत्रित वातावरण में मिलाया जाता है, जिससे वो प्राकृतिक रुकावट अपने आप हट जाती है। कई मामलों में, खासकर जहां शुक्राणु-अंडा मिलन में दिक्कत का शक हो, वहां एक-एक शुक्राणु को सीधे अंडे में डालने वाली उन्नत तकनीक – शुक्राणु इंजेक्शन तकनीक (ICSI) भी साथ में अपनाई जाती है।

IVF success chances explained by fertility specialist to couple in Haryana
Does IVF Guarantee a Baby? 7 Facts for Couples in Haryana – टेस्ट ट्यूब बेबी की सफलता दर को लेकर उम्र के हिसाब से ईमानदार आंकड़े, ताकि आप सही उम्मीद के साथ इलाज शुरू करें।

ईमानदारी से कहें तो – हर किसी को तुरंत टेस्ट ट्यूब बेबी की ज़रूरत नहीं

यहां एक बात साफ कहनी ज़रूरी है: अगर महिला की उम्र तीस वर्ष से कम है और बांझपन की अवधि दो साल से कम है, तो पहले दो-तीन बार गर्भाशय में शुक्राणु प्रवेश (IUI) की प्रक्रिया आज़माना एक उचित कदम हो सकता है। हर अज्ञात बांझपन मामले में सीधे सबसे उन्नत इलाज पर जाना ज़रूरी नहीं।

लेकिन अगर उम्र पैंतीस के पार है, तीन से ज़्यादा बार यह प्रक्रिया असफल हो चुकी है या बांझपन की समस्या तीन साल से ज़्यादा खिंच चुकी है – तो समय बर्बाद करने के बजाय सीधे टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया अपनाना ज़्यादा समझदारी भरा फैसला है, क्योंकि उम्र के साथ अंडों की गुणवत्ता कम होती जाती है और ये प्रक्रिया पलटी नहीं जा सकती।

अज्ञात बांझपन  – ये गलतियां बिल्कुल ना करें

  • झाड़-फूंक और घरेलू नुस्खों में साल बर्बाद ना करें – जितनी देर होगी, अंडों की गुणवत्ता उतनी गिरती जाएगी
  • बार-बार वही असफल तरीका ना दोहराएं – अगर तीन बार कोशिश असफल हो चुकी है, तो चौथी बार भी वही तरीका शायद ही कोई नया नतीजा दे
  • इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर से सही सवाल ज़रूर पूछें – क्या जांच पूरी हुई है, किस तकनीक की सलाह दी जा रही है और क्यों
  • उम्र को नज़रअंदाज़ ना करें – पैंतीस वर्ष के बाद हर महीना कीमती है
  • खर्च को लेकर अंधेरे में ना रहें – इलाज शुरू करने से पहले पूरी लागत की जानकारी ज़रूर लें, कोई छुपा हुआ खर्च नहीं होना चाहिए

IVF पहले सफल नहीं होने के बाद अगली treatment planning से पहले fertility specialist से चर्चा करते हुए couple.

IVF पहले सफल नहीं हुआ? असफल IVF के बाद दूसरी राय कब लें – अगर पहले कोशिश असफल रही है, तो दोबारा वही तरीका अपनाने से पहले यह ज़रूर पढ़ें।

हरियाणा और राजस्थान के मरीज़ों के लिए खास सलाह

रेवाड़ी, नारनौल, भिवाड़ी, धारूहेड़ा, बावल, कोसली, महेंद्रगढ़ या मानेसर से आने वाले मरीज़ों को अब इलाज के लिए दिल्ली या गुरुग्राम जाने की ज़रूरत नहीं। जिजीविषा अस्पताल एवं प्रजनन केंद्र, रेवाड़ी में वही उन्नत तकनीक – टेस्ट ट्यूब बेबी, शुक्राणु इंजेक्शन तकनीक, गर्भाशय में शुक्राणु प्रवेश, अपनी खुद की भ्रूण विज्ञान प्रयोगशाला – घर के पास ही उपलब्ध है, डॉ. अंशु यादव की सीधी देखरेख में, जो दिल्ली के एम्स से प्रजनन चिकित्सा में उच्च विशेषज्ञता प्राप्त हैं।

जिजीविषा अस्पताल को बाकी केंद्रों से अलग बनाने वाली कुछ सच्ची बातें: पंद्रह साल से ज़्यादा का अनुभव, एक हज़ार से ज़्यादा परिवारों की मदद, अपनी खुद की भ्रूण विज्ञान प्रयोगशाला जो बाहरी प्रयोगशाला पर निर्भरता खत्म करती है और सबसे ज़रूरी – हर मरीज़ को सीधे सबसे महंगा इलाज बेचने के बजाय, पहले सही कारण ढूंढने पर ज़ोर।

अज्ञात बांझपन  – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रेवाड़ी में टेस्ट ट्यूब बेबी का खर्च कितना आता है? 

खर्च कई बातों पर निर्भर करता है – महिला की उम्र, कितने चक्र की ज़रूरत है और क्या शुक्राणु इंजेक्शन जैसी उन्नत तकनीक चाहिए या नहीं। जिजीविषा अस्पताल में पहली ही सलाह-मशविरे में पूरी लागत साफ-साफ बता दी जाती है, कोई छुपा हुआ खर्च नहीं।

क्या रेवाड़ी के पास ही कोई अच्छा प्रजनन केंद्र है या दिल्ली-गुरुग्राम जाना ज़रूरी है? 

अब रेवाड़ी, नारनौल, भिवाड़ी और धारूहेड़ा के मरीज़ों को इलाज के लिए बड़े शहर भागने की ज़रूरत नहीं। जिजीविषा अस्पताल में वही उन्नत तकनीक घर के पास, बिना लंबा सफर किए उपलब्ध है।

अगर गर्भाशय में शुक्राणु प्रवेश की प्रक्रिया असफल हो जाए, तो क्या सीधे टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया अपनाना सही है?

अगर दो-तीन बार यह प्रक्रिया असफल हो चुकी है, तो वही तरीका दोहराने के बजाय टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया अपनाना ज़्यादा समझदारी भरा फैसला है – खासकर अगर उम्र बत्तीस-तैंतीस वर्ष से ऊपर है।

टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया में कितने दिन लगते हैं और परिणाम कब पता चलता है? 

पूरी प्रक्रिया – दवाओं से शुरू होकर भ्रूण स्थानांतरण तक – आमतौर पर चार से छह हफ्ते की होती है। अगर पहली बार में गर्भधारण की पुष्टि ना हो, तो जमे हुए भ्रूण को दोबारा स्थानांतरित करने का विकल्प भी बिना पूरी प्रक्रिया दोहराए मौजूद रहता है।

अगर पहले कहीं और इलाज असफल हो चुका है, तो क्या दूसरी राय लेनी चाहिए? 

बिल्कुल लेनी चाहिए – खासकर अगर पहले कहीं और से “अज्ञात बांझपन” का निष्कर्ष मिला हो। जिजीविषा अस्पताल में पहली सलाह-मशविरे में पुरानी रिपोर्ट्स दोबारा जांची जाती हैं, जिससे अनज़रूरी जांच दोहराने से बचा जा सके।

रेवाड़ी में अपॉइंटमेंट कैसे बुक करें? 

सीधे अस्पताल में फोन करके या अस्पताल जाकर अपॉइंटमेंट बुक की जा सकती है। पहली सलाह-मशविरे में पुरानी रिपोर्ट्स देखकर सही इलाज का रास्ता तुरंत बताया जाता है।

एक साल से कोशिश कर रहे हैं पर रिपोर्ट सामान्य है? देर मत कीजिए – जिजीविषा अस्पताल एवं प्रजनन केंद्र, रेवाड़ी में आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और डॉ. अंशु यादव से सही इलाज की तरफ पहला कदम उठाएं।

चिकित्सा अस्वीकरण:

यह लेख केवल रोगी शिक्षा के उद्देश्य से है और भारत के ART (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के अनुरूप, इसे किसी चिकित्सीय सलाह या इलाज के परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कृपया अपनी व्यक्तिगत स्थिति के सही आकलन के लिए किसी योग्य प्रजनन विशेषज्ञ से सलाह लें।

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